Saturday, September 24, 2022

लिखूं क्या आज सब कुछ लिखा जा चुका

 लिखूं क्या आज सब कुछ लिखा जा चुका

कहूं क्या आज सब कुछ कहा जा चुका

ये कहने लिखने की आस में 

जिंदगी से बहुत जा यू ही गुजर जा चुका 


हर एक की जिंदगी को टटोला है मैंने

जीने की आस में सब हैं 

Bs ek bar mauka mile to jeene 

यूंही kat rahe zindagi 

Koi mere dard se jiye to shi 


लिखूँ क्या आज—सब कुछ लिखा जा चुका,

कहूँ क्या आज—सब कुछ कहा जा चुका।


ये कहने-लिखने की जो बची-सी आस है,

उसी में ज़िंदगी का हिस्सा जला जा चुका।


हर एक की ज़िंदगी को टटोला है मैंने,

हर शख़्स यहाँ बस जीने का बहाना बना चुका।


"बस एक बार मौका मिले"—ये ख्वाहिश सभी की है,

मगर वक़्त हर ख़्वाब को चुपचाप सज़ा दे चुका।


यूँ ही कट रही है ज़िंदगी—बिना किसी वजह,

हर दिन खुद को थोड़ा-थोड़ा मिटा चुका।


कोई मेरे दर्द से जी के तो देखे "राख़",

मैं हँसते-हँसते कितनी बार मर चुका।