लिखूं क्या आज सब कुछ लिखा जा चुका
कहूं क्या आज सब कुछ कहा जा चुका
ये कहने लिखने की आस में
जिंदगी से बहुत जा यू ही गुजर जा चुका
हर एक की जिंदगी को टटोला है मैंने
जीने की आस में सब हैं
Bs ek bar mauka mile to jeene
यूंही kat rahe zindagi
Koi mere dard se jiye to shi
लिखूँ क्या आज—सब कुछ लिखा जा चुका,
कहूँ क्या आज—सब कुछ कहा जा चुका।
ये कहने-लिखने की जो बची-सी आस है,
उसी में ज़िंदगी का हिस्सा जला जा चुका।
हर एक की ज़िंदगी को टटोला है मैंने,
हर शख़्स यहाँ बस जीने का बहाना बना चुका।
"बस एक बार मौका मिले"—ये ख्वाहिश सभी की है,
मगर वक़्त हर ख़्वाब को चुपचाप सज़ा दे चुका।
यूँ ही कट रही है ज़िंदगी—बिना किसी वजह,
हर दिन खुद को थोड़ा-थोड़ा मिटा चुका।
कोई मेरे दर्द से जी के तो देखे "राख़",
मैं हँसते-हँसते कितनी बार मर चुका।
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