Sunday, April 12, 2020



हर बार यही होता आया 
जितनी बार दिल लगा ,उसे वो तोड़ता आया 
हमें भी ये रिवाज़ सा लग गया 
अपनों की खातिर चुपचाप निभाता आया 

अब कोई ना ये तोड़े तो हैरान होता गया 

बहुत हसने की कीमत ये चुकाई 
हर रात अनकही अनसुलझी बिताई 

बारिश होती रही रात भर इन आंखों से 
तनहाई के गले लग कर रोए रात भर
पलकों ने भी खूब बेवफाई निभाई
बहुत हसने की हमने कीमत ये चुकाई


रोए गले लग के तन्हाई के 

हर रोज़ रात तन्हाई में बिताई 

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