हे राष्ट्र तुम्हे प्रणाम
हे राष्ट्र तुम्हे प्रणाम
गाता हूँ तेरी अमरता का गुन गान
हे राष्ट्र तुम्हे प्रणाम
पर किन शब्दों से कह दूं
मै तुझको महान
हे राष्ट्र तुम्हे प्रणाम
हे राष्ट्र तुम्हे प्रणाम
भूखे सोते जहाँ इंसान
रबड़ी मलाई खाते श्वान
कैसे कह दूं तुझको महान
हे राष्ट्र तुम्हे प्रणाम
सौ-सौ जाति सौ-सौ धर्म
बटे पड़े हैं यहाँ भगवान्
रोज यहाँ दंगे होते
हर क्षण बनते मरघट शमशान
कैसे कह दूं तुझको महान
हे राष्ट्र तुम्हे प्रणाम
हर बम धमाके में जहां
मरती आम जनता आम इंसान
झूठी सांत्वना आश्वासन देकर
बनते नेता यहां महान
कैसे कह दूं तुझको महान
हे राष्ट्र तुम्हे प्रणाम
भगत आजाद बिस्मिल महान
फीके पड़े हैं उनके बलिदान
घट घट पे जो घोटाले करते
होता यहाँ उनका सम्मान
कैसे कह दूं तुझको महान
हे राष्ट्र तुम्हे प्रणाम
चंद पढ़े लिखों को छोड़ो
बाकी जनता अनपढ़ अनजान
न बिजली पानी उसपे क़र्ज़ महान
आत्महत्या कर रहे किसान
कैसे कह दूं तुझको महान
हे राष्ट्र तुम्हे प्रणाम
लोकतंत्र की रक्षा की खातिर
कानून बनाया बड़ा महान
मुजरिम बहार घुमा करते
बस पिसते हैं बेबस इंसान
कैसे कह दूं तुम्हे महान
हे राष्ट्र तुम्हे प्रणाम
कहते हैं भारत महान
खुद जन्मे थे यहाँ भगवान्
चंद पैसों की खातिर अब
बदले जाते हैं भगवान्
कैसे कह दूं तुझको महान
हे राष्ट्र.......
धर्मेन्द्र
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