है राग मेरा ,
हो रागिनी तुम
हैं गीत मेरे
उनकी आवाज़ हो तुम
हैं शब्द मेरे
उनकी पहचान हो तुम
है ध्वनि मेरी
प्रतिध्वनी हो तुम
हैं भाव मेरे
उनकी संकल्पना हो तुम
हैं स्वप्न मेरे
उन स्वप्नों का नाम हो तुम
हैं अधर मेरे
उनकी मुस्कान हो तुम
हैं लक्ष्य मेरे
उनका मार्ग हो तुम
हैं विचार मेरे
उनकी प्रेरणा हो तुम
हूँ जीवित मै
हो जीने का अहसास तुम
है जीवन मेरा
हो इसकी साँस तुम
मेरे जीवन की धूप में
सुनहरी छाया हो तुम
मेरे ढलते जीवन की
एकमात्र आशा हो तुम
मेरे जीवन समर में
अकेली संगिनी हो तुम
मेरी हर उलझन का
एक सुलझा हल हो तुम
मेरी हर उपलब्धि से बढ़कर
सबसे बड़ी उपलब्धि हो तुम
मेरी हर ख़ुशी से बढकर
सबसे बड़ी ख़ुशी हो तुम
मेरे घर-मंदिर की
देवी हो तुम
मेरी पूजा मेरी आस्था
मेरा विस्वास हो तुम
मेरी साँस मेरी शक्ति
मेरे जीने का आधार हो तुम
और सबसे बढ़कर
मेरी आत्मा मेरा संसार हो तुम
.................कुमार धर्मेन्द्र
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