नए नए आये थे
एक दूजे से अनजाने थे
खुलकर मिलने में भी
हम सब थोडा सकुचाते थे
नाम पूछते बतलाते थे
फिर थोडा सा मुस्काते थे
निश्चल कोमल मन से
अपने भाव जगाते थे
सुबह सुबह उठकर मेस में
हाल चाल बतियाते थे
बस से कॉलेज तक
हम सब संग में जाते थे
हर assignment छाप छाप कर
अपना ज्ञान बढ़ाते थे
पहले जाने वाली बस में
लद लद कॉलेज से जाते थे
mass bunk करके हम सब
कुछ पढ़ाकुओं को समझाते थे
कॉलेज ना जाने पर हम सब
खूब proxy लगवाते थे
कुछ का नाम बिगाड़ा करते
कुछ की मौज उड़ाते थे
जन्म दिन के मौके पर
लातों से भूत बनाते थे
VP की class में हम सब
खर्राटे खूब लगाते थे
VT को देख देख
मन ही मन हर्षाते थे
मतभेद कभी जो बढ़ गये
खुद ही सुलझाते थे
एक दूजे से घुल मिल
माहौल को मस्त बनाते थे
सुट्टे पे सुट्टा हम सब
खूब उड़ाते थे
हर ख़ुशी के मौके पर
bear पे bear चढाते थे
exam समय आने पर
खुद को रात रात जगाते थे
समझ नहीं आने पर
"मुझे पढ़ा दे " का नारा खूब लगाते थे
जैसे तैसे exam पास कर
यूहीं समय बितातते थे
रात में खुद को नीद ना आने पर
जोर जोर से चिल्लाते थे
अब placement time आया है
tension को संग में लाया है
रात रात घिसते हैं
फिर भी कहीं नहीं हो पाया है
कुछ की लग गयी है
कुछ की लगने वाली है
नौकरी की चिंता क्यूँ करते हो
वो तो अपनी घरवाली है
आज नहीं तो कल
लग ही जाएगी
कुछ को google कुछ को tcs
यारों मिल ही जाएगी
ये मौज मस्ती के पल
फिर ना कभी आएंगे
चार बरस जीवन के ये
सबसे सुखमय कहलाएँगे
बीबी होगी बच्चे होंगे
उनको खूब बताएँगे
चार बरस जीवन के
यारों वापस कभी नहीं आयेंगे
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