Sunday, August 14, 2011

बूढ़े भारत को कोई नयी जवानी दे दे

मेरे बुझते दीपक को कोई
चंद रोशनी दे दे
खून से सींचा है कोई
दो बूंद पसीने की दे दे

थोड़ी सी मुझको कोई
अपनी चंद जवानी दे दे
मेरे बूढ़े भारत को कोई
फिर से नयी रवानी दे दे

सूखे पड़े नर कंकालों में कोई
चंद रक्त की बुँदे दे दे
देश के युवकों में से कोई
मुझको चंद स्वाभिमानी दे दे

१०० करोड़ों में से कोई
आजादी के चंद दीवाने दे दे
फिर से मेरी भारत माँ कोई
साँस हवा औ पानी दे दे

तू इन छंदों की खातिर
माँ मेरी तू क़ुरबानी ले ले
पर मेरी माँ को इनमे से कोई
फिर से नयी निशानी दे दे

मेरे बूढ़े भारत को कोई
फिर से नयी जवानी दे दे

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