चंद रोशनी दे दे
खून से सींचा है कोई
दो बूंद पसीने की दे दे
थोड़ी सी मुझको कोई
अपनी चंद जवानी दे दे
मेरे बूढ़े भारत को कोई
फिर से नयी रवानी दे दे
सूखे पड़े नर कंकालों में कोई
चंद रक्त की बुँदे दे दे
देश के युवकों में से कोई
मुझको चंद स्वाभिमानी दे दे
१०० करोड़ों में से कोई
आजादी के चंद दीवाने दे दे
फिर से मेरी भारत माँ कोई
साँस हवा औ पानी दे दे
तू इन छंदों की खातिर
माँ मेरी तू क़ुरबानी ले ले
पर मेरी माँ को इनमे से कोई
फिर से नयी निशानी दे दे
मेरे बूढ़े भारत को कोई
फिर से नयी जवानी दे दे
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